Sunday, 27 May 2012

आज के दिन


तुम पर निसार होने की
कोई तमन्ना नहीं
न ही किसी सपने के लिए नींद है
आँखों में

मुस्कराते हुए
नहीं आ रहा कोई इस ओर
न ही गीत गा रहा
कोई दीवाना  आज के दिन

अय जान
आज के दिन नहीं है तुम्हारा एहसास
जबकि पास हो तुम खुद
ऐसे ही किसी सर्द  दिन
तुम्हारी बुनी हुई स्वेटर की
गरमाहट पास तक नहीं
फटकने देती थी तुम्हारे पास न होने
की ठंडी उदासी को  


सुदीप शुक्ल

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